जापान में नाम रोशन करेगी Majdoor ki beti pooja
Barabanki News – अगर हौसले बुलंद हों तो गरीबी कोई रुकावट नहीं होती है। इसका बेहतरीन उदाहरण पेश किया है बाराबंकी की बेटी पूजा ने जो एक मजदूर की बेटी हैं और अब जापान में होने वाले एक बड़े साइंस प्रोग्राम में हिस्सा लेने जा रही हैं।
बाराबंकी जिले के सिरौलीगौसपुर क्षेत्र की छात्रा पूजा ने अपनी प्रतिभा और नवाचार से एक मिसाल कायम की है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से आने वाली पूजा ने “धूलरहित थ्रेशर” का मॉडल तैयार कर राष्ट्रीय स्तर पर सराहना पाई है। अब वह इस मॉडल के साथ जापान की यात्रा पर जा रही हैं, जहां वह टोक्यो की विश्वविद्यालयों और विज्ञान प्रयोगशालाओं का दौरा करेंगी।
पूजा कक्षा 12 में पढ़ रही है। पूजा वर्ष 2025 में जापान के साकुरा साइंस हाई स्कूल प्रोग्राम (Sakura Science High School Programme) में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार (Innovation) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है। पूजा उत्तर प्रदेश से इस कार्यक्रम में चयनित होने वाली इकलौती और पूरे भारत से चुने गए 54 छात्रों में उनका नाम शामिल है।
पूजा वर्तमान में जगदीशचंद्र फतेहराय इंटर कॉलेज में कक्षा 9 की छात्रा हैं। उनका नवाचार यात्रा वर्ष 2020 में शुरू हुई, जब उन्होंने कक्षा 8 में पढ़ाई के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय अगेहरा में यह मॉडल तैयार किया। पूजा की मां सुनीला उसी विद्यालय में रसोईया हैं, जबकि पिता पुत्तीलाल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार एक झोपड़ी में रहता है, लेकिन पूजा की उड़ान अब अंतरराष्ट्रीय हो चुकी है।
गरीबी में पला-बढ़ा हुनर
पूजा का परिवार बाराबंकी जिले के एक छोटे से गांव में रहता है। उनके पिता पुट्टीलाल मजदूरी करते हैं, वहीं मां सुषीला देवी एक सरकारी स्कूल में रसोईया सह सहायिका के तौर पर कार्यरत हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण है और पूजा कच्चे मकान में रहती हैं। लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी परिस्थितियों को अपनी मेहनत पर हावी नहीं होने दिया।
कक्षा 8 में बनाया था ‘डस्ट फ्री थ्रेशर’
पूजा ने अपना नवाचार (Invention) कक्षा 8 में ही कर लिया था। उन्होंने अपने विज्ञान शिक्षक राजीव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में एक डस्ट-फ्री थ्रेशर (Dust-Free Thresher) का मॉडल तैयार किया था। इस थ्रेशर की खासियत यह है कि गेहूं की कटाई या मड़ाई के दौरान निकलने वाली धूल को बाहर निकलने से रोकता है, जिससे आसपास के लोगों को स्वच्छ हवा मिलती है और सांस संबंधी समस्याएं नहीं होतीं।
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बच्चों की खांसी बनी प्रेरणा
INSPIRE अवॉर्ड की जिला नोडल अधिकारी पूनम सिंह बताती हैं कि पूजा को इस इनोवेशन की प्रेरणा तब मिली, जब उन्होंने अपने स्कूल के पास एक साधारण थ्रेशर मशीन को चलते हुए देखा। उस मशीन से निकलने वाली धूल की वजह से कई छोटे बच्चे लगातार खांसते रहते थे। तब पूजा ने ठान लिया कि वह ऐसा कुछ बनाएंगी जिससे यह समस्या दूर हो सके।
INSPIRE अवॉर्ड से लेकर जापान तक
पूजा के मॉडल को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर INSPIRE अवॉर्ड के तहत मान्यता मिली। इसके बाद उनका चयन जापान के साकुरा प्रोग्राम के लिए हुआ। यह कार्यक्रम जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी (JST) द्वारा आयोजित किया जाता है, जो दुनियाभर के प्रतिभावान छात्रों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में साथ लाकर सीखने का मौका देता है।
जिला विद्यालय निरीक्षक बोले – पूरे जिले को गर्व
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), बाराबंकी, ओ. पी. त्रिपाठी ने पूजा की तारीफ करते हुए कहा, “पूजा बहुत ही साधारण परिवार से हैं लेकिन उनमें ज्ञान पाने की अद्भुत इच्छा है। उनके इनोवेशन को ना सिर्फ राज्य बल्कि देशभर में सराहा गया। अब वह जापान में हमारे जिले और पूरे प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।”
जापान यात्रा की तैयारी
पूजा की यह जापान यात्रा 14 जून से 21 जून तक चलेगी। इस दौरान वह न सिर्फ जापानी छात्रों और वैज्ञानिकों के साथ विचार-विमर्श करेंगी, बल्कि दुनिया के कई देशों से आए छात्रों के साथ शैक्षिक नवाचार पर कार्य करेंगी।
साकुरा साइंस प्रोग्राम का उद्देश्य
साकुरा साइंस हाई स्कूल प्रोग्राम का उद्देश्य है –
- विभिन्न देशों के छात्रों के बीच शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देना
- विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नवाचार को समझना
- जापान के उच्च शिक्षण संस्थानों का अनुभव लेना
- वैश्विक मंच पर नए विचारों का आदान-प्रदान करना
एक बेटी की मेहनत बना पूरे समाज की प्रेरणा
पूजा की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सपने पूरे करने के लिए पैसों की नहीं, मेहनत और लगन की जरूरत होती है। एक सामान्य मजदूर की बेटी ने अपने हौसले और बुद्धिमत्ता से ऐसा काम कर दिखाया है, जिससे न सिर्फ उसका परिवार बल्कि पूरा यूपी गौरव महसूस कर रहा है।
क्या कहती हैं पूजा?
पूजा ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक दिन जापान जाऊंगी। यह सब मेरे टीचर, माता-पिता और स्कूल के सहयोग से संभव हुआ है। मैं आगे भी विज्ञान के क्षेत्र में काम करना चाहती हूं और गांव के बच्चों के लिए कुछ करना चाहती हूं।”
भविष्य की योजना
पूजा अब आगे चलकर इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में ऐसे और भी इनोवेशन करना चाहती हैं जिससे आम लोगों की जिंदगी आसान हो सके। खासकर किसानों और गांव के बच्चों की मदद के लिए वह नई तकनीकें तैयार करना चाहती हैं।
पूजा की कहानी हजारों-लाखों बच्चों के लिए एक प्रेरणा है। यह दिखाता है कि यदि सरकार, शिक्षक और परिवार मिलकर किसी छात्र का साथ दें, तो कोई भी सपना नामुमकिन नहीं है। पूजा का जापान जाना न सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत के लिए गर्व की बात है।
©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
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