खैराबाद के मुहल्ला तुर्क पट्टी में यूनाइटेड वार्ता और सामाजिक कार्यकर्ता नोमान सिद्दीकी और उनकी टीम ने ख़ैराबाद में अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी के अदबी और सियासी योगदान पर कार्यक्रम (साहित्यिक कार्यक्रम) का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का मकसद था मशहूर स्वतन्त्रता सेनानी “अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी की अदबी और सियासी हैसियत” पर रोशनी डालना। इस जलसे में शहर और बाहर से तमाम अदबी, सामाजिक और सियासी शख्सियतों ने शिरकत की।
जलसे की सदारत मशहूर आलिमे-दीन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने की, जबकि मुख्य अतिथि उर्दू सहाफत की मशहूर शख्सियत और ‘नया दौर’ के पूर्व एडिटर डॉक्टर सुहैल वहीद रहे।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला सदर मस्त हफीज रहमानी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन क़ारी सलाहुद्दीन और नोमान सिद्दीकी ने संभाला।
कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज फरीद की कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद शहर के मशहूर मुआर्रिख (इतिहासकार) और मुसन्निफ (लेखक) फरीद बिलग्रामी ने अल्लामा फज़ले हक़ की जिंदगी और उनके काम पर एक तफ्सीली मकाला (विस्तृत लेख) पेश किया।
मौके पर मौजूद पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रेम त्रिपाठी ने अपने अपने सम्बोधन में कहा कि-
“अल्लामा साहब ने आज़ादी की जंग में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ़ जो फतवा दिया था, वो किसी एक हिंदू या मुसलमान की आज़ादी के लिए नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए था।”
डॉक्टर सुहैल वहीद ने कहा कि-
“हमने अल्लामा को अदब में ग़ालिब के हवाले से भी पढ़ा है, लेकिन आज के दौर में उनकी सियासी समझ पर ज़्यादा जोर देना चाहिए। हमारे इतिहासकारों ने उनकी सियासी जिंदगी पर बहुत कम काम किया है जबकि आज इसकी बहुत जरूरत है। हमें अपनी कौम की सियासी तारीख जरूर लिखनी चाहिए, ताकि आने वाली नस्लें इससे रहनुमाई ले सकें।”
अपने सदारती खिताब में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने जोर देकर कहा कि-
“कौम की बक़ा (अस्तित्व) के लिए हमें अपना तालीमी निज़ाम (शिक्षा प्रणाली) बेहतर बनाना होगा। अल्लामा फज़ले हक़ की शोहरत सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनकी तालीम की वजह से थी। इसलिए हमें चाहिए कि अपने बच्चों को आला तालीम (उच्च शिक्षा) दिलवाएं। जब हमारे बच्चे आईएएस, आईपीएस बनेंगे, तो वो हमारी कौम की आवाज बनेंगे। अगर माँ-बाप पहले दिन से ही बच्चों की तालीम और तर्बियत पर ध्यान दें, तो यकीन मानिए, कामयाबी और तरक्की की कोई भी मंजिल हमसे दूर नहीं रह सकती।”
उन्होंने आयोजकों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि आज के दौर में इस तरह के कार्यक्रमों की बहुत जरूरत है।
मौके पर मुफ्ती आफ़ताब नदवी और अफज़ाल खान ने भी अल्लामा के जंगे आजादी में निभाए गये अहम किरदार पर रोशनी डाली। आखिर में सभी मेहमानों को शॉल और यादगार तोहफे देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर सज्जादानशीन दरगाह हज़रत बड़े मखदूम साहब नजमुल हसन उस्मानी शुऐब मियां, सलमान सिद्दीकी, सैयद मोईन अलवी, एहतेशाम अंसारी, काज़िम हुसैन, आरिफ अली अंसारी (बानी और नाज़िम खदीजा लाइब्रेरी), जफरयाब बेग, अकील अंसारी, रिज़वान अंसारी, फरीद अंसारी, सैयद इमरान किरमानी, सरकार आलम, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद असलम, अवेज अहमद खान, फहीम अहमद, अब्दुल अज़ीज, मौलाना अबुल खैर नदवी, एडवोकेट सरदार अली, खालिद बिट्टू सहित शहर की तमाम मोहतरम शख्सियतें मौजूद रहीं।
आखिर में नोमान सिद्दीकी और आयोजकों ने सभी मेहमानों और श्रोताओं का दिल से शुक्रिया अदा किया।
©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
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