एक बड़े पैमाने के Afghanistan earthquake ने मंगलवार की शाम को भारी तबाही मचाई। इस प्रलयकारी भूकंप के झटकों ने अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हज़ारों घायल हो गए। यह झटका इतना ताकतवर था कि इसकी वजह से अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक की इमारतें हिल गईं।
Afghanistan earthquake: पहाड़ों में गांव, राहत कार्य में दिक्कत
Afghanistan earthquake का केंद्र अफगानिस्तान के पाक्तिका प्रांत में ज़र्मक जिले के पास बताया जा रहा है। यह इलाका पहाड़ी और दुर्गम है, जहाँ तक पहुँचना राहतकर्मियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। खबरों के मुताबिक, कई गाँव पूरी तरह से तबाह हो गए हैं और लोग मलबे में दबे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें रात-दिन एक करके लोगों को बचाने में जुटी हुई हैं, लेकिन बिजली गुल होना और संचार व्यवस्था चरमरा जाने से काम और भी मुश्किल हो गया है।
एक स्थानीय निवासी, अहमद जान, ने फोन पर बताया, “यह किसी कयामत से कम नहीं था। अचानक ज़ोरदार झटके आए और देखते ही देखते हमारे घर की दीवारें ढह गईं। चारों तरफ सिर्फ धूल और चीखें सुनाई दे रही थीं। हम अपने परिवार को बचाने के लिए बाहर भागे, लेकिन बहुत से लोग बाहर नहीं निकल पाए।”
Afghanistan earthquake रिक्टर स्केल पर 6.1 की तीव्रता, आए कई ऑफ्टरशॉक
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, इस Afghanistan earthquake की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई है। इसकी गहराई ज़मीन से लगभग 51 किलोमीटर नीचे थी। मुख्य झटके के बाद अब तक कई हल्के ऑफ्टरशॉक (aftershocks) भी महसूस किए गए हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। लोग अपने घरों में वापस जाने से डर रहे हैं और खुले मैदानों में रुके हुए हैं।
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि यह इलाका यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच स्थित है, जहाँ हिमालय जैसे पहाड़ बने हैं। इस वजह से यहाँ भूकंप आने की संभावना हमेशा बनी रहती है। इससे पहले भी इस region में कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं।
Afghanistan earthquake में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, अस्पताल हालात से जूझ रहे
Afghanistan earthquake मौत का आँकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट्स में 280 के आसपास मौत की खबर थी, लेकिन अब यह संख्या 800 को पार कर गई है और हज़ारों लोग घायल हैं। आशंका जताई जा रही है कि दूर-दराज़ के गाँवों से और भी खबरें आने के बाद यह आँकड़ा और बढ़ सकता है।
घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि स्थानीय अस्पताल उनका इलाज करने में असमर्थ हैं। अस्पतालों में बिस्तर, दवाइयों और डॉक्टरों की कमी है। ज़ख्मी लोगों को पास के शहरों में ले जाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बुरी सड़कों और बारिश की वजह से परिवहन में भी दिक्कतें आ रही हैं।
पाक्तिका प्रांत के एक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहम्मद इस्माइल ने बताया, “हमारे पास संसाधन बहुत सीमित हैं। हमें तुरंत मेडिकल सप्लाई, खून और विशेषज्ञ डॉक्टरों की ज़रूरत है। बहुत से मरीज़ गंभीर हालत में हैं और उन्हें तुरंत सर्जरी की आवश्यकता है।”
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने की मदद की पेशकश
इस भीषण त्रासदी के बाद दुनिया के कई देशों ने अफगानिस्तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, भारत, पाकिस्तान, तुर्की, चीन और अमेरिका सहित कई देशों ने राहत सामग्री और बचाव दल भेजने की पेशकश की है। संयुक्त राष्ट्र ने अपने इमरजेंसी फंड से 10 मिलियन डॉलर जारी करने का ऐलान किया है।
हालाँकि, अफगानिस्तान में सत्तारूढ़ तालिबान सरकार के साथ अंतरराष्ट्रीय संबंध जटिल हैं, जिससे मदद का समन्वय एक चुनौती बन सकती है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों से अपील की है कि वे तुरंत राहत कार्यों में मदद के लिए आगे आएं।
तालिबान सरकार ने जताया शोक, राहत कार्य तेज करने के दिए निर्देश
तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने Afghanistan earthquake पर गहरा शोक जताया है और प्रभावितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने सरकार के सभी एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे हर संभव तरीके से पीड़ितों की मदद करें और राहत कार्यों को तेज़ करें।
अफगानिस्तान के आपदा प्रबंधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अलार्म लगा दिया है और सैन्य बलों को भी राहत और बचाव कार्य में लगा दिया गया है। हेलीकॉप्टरों के ज़रिए दूरदराज के इलाकों में खाने के पैकेट, तंबू, कंबल और दवाइयाँ पहुँचाई जा रही हैं।
काबुल से इस्लामाबाद तक काँपे लोग
इस Afghanistan earthquake के झटके सैकड़ों किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद, पेशावर, लाहोर और मुर्री जैसे शहरों में भी लोग सड़कों पर भागने लगे। लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए, जिनमें देखा जा सकता है कि कैसे फर्नीचर और पंखे हिल रहे थे और लोग डरकर अपने घरों और ऑफिसों से बाहर निकल आए।
इस्लामाबाद के एक रेजिडेंट, ओमैर राशिद, ने बताया, “मैं अपने परिवार के साथ डिनर कर रहा था कि अचानक सोफा हिलने लगा। पहले तो लगा शायद कोई भारी वाहन गुजर रहा है, लेकिन जब हिलना बंद नहीं हुआ तो समझ आया कि भूकंप है। हम तुरंत बाहर आ गए। बाहर भी सभी पड़ोसी इकट्ठा हो गए थे।”
भूकंप से बचाव के उपाय: क्या करें और क्या न करें?
ऐसी आपदाओं के वक्त थोड़ी सी सतर्कता और जानकारी कई जानें बचा सकती है। भूकंप आने पर याद रखें:
- क्या करें:
- अगर आप इमारत के अंदर हैं, तो मजबूत टेबल या बिस्तर के नीचे छिप जाएँ।
- अपने सिर को तकिए या हाथों से ढक लें।
- लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
- अगर बाहर हैं, तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर खुले मैदान में चले जाएँ।
- गाड़ी चला रहे हैं, तो धीरे-धीरे गाड़ी रोककर खुले area में रुक जाएँ।
- क्या न करें:
- घबराएँ नहीं और भागने की कोशिश न करें।
- दरवाजे के नीचे न खड़े हों, क्योंकि यह जगह सुरक्षित नहीं मानी जाती है।
- मोमबत्ती या माचिस न जलाएँ, गैस लीक होने का खतरा हो सकता है।
भविष्य के लिए चेतावनी: कमजोर इमारतें बनीं बड़ी वजह
यह त्रासदी (Afghanistan earthquake 2025) एक बार फिर उन खामियों की ओर इशारा करती है, जो लंबे समय से अफगानिस्तान जैसे देश में मौजूद हैं। दशकों के युद्ध और गरीबी की वजह से यहाँ बुनियादी ढाँचा बहुत कमजोर है। ज्यादातर घर कच्ची ईंटों और मिट्टी के बने होते हैं, जो भूकंप जैसी आपदा में आसानी से ढह जाते हैं। भूकंपरोधी इमारतों के निर्माण पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता।
आपदा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह की घटना किसी विकसित देश में आती, तो नुकसान का स्तर इतना भयावह नहीं होता। इसलिए जरूरत इस बात की है कि न सिर्फ अफगानिस्तान, बल्कि पूरे region में भूकंपरोधी इमारतों के निर्माण और आपदा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। लोगों को जागरूक करने और नियमित रूप से मॉक ड्रिल कराने की आवश्यकता है।
इस वक्त, दुनिया की निगाहें अफगानिस्तान के उन पहाड़ी इलाकों पर टिकी हैं, जहाँ अभी भी कई लोग मलबे के नीचे जिंदगी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हर पल कीमती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे हर संभव कोशिश करें ताकि और जानें न बचें और जो बच गए हैं, उन्हें तुरंत राहत मुहैया कराई जा सके। यह प्रकृति का एक भयानक कहर है, और इससे निपटने के लिए पूरी मानवता को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।
©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध
Share with your Friends