खैराबाद में अमर शहीद Allama Fazal-e-Haque Khairabadi की 164th Punyatithi मनाई, उनकी कुर्बानी को सलाम किया गया

खैराबाद में अमर शहीद Allama Fazal-e-Haque Khairabadi की 164th Punyatithi मनाई, उनकी कुर्बानी को सलाम किया गया

सीतापुर/खैराबाद। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी, मर्द-ए-मुजाहिद और विद्वान Allama Fazal-e-Haque Khairabadi की 164वीं पुण्य तिथि यहाँ खैराबाद में बड़े ही सम्मान और जोश के साथ मनाई गई।

खैराबाद में अमर शहीद Allama Fazal-e-Haque Khairabadi की 164th Punyatithi मनाई, उनकी कुर्बानी को सलाम किया गया

इस मौके पर यह सवाल भी उठा कि आज़ादी की इस मशाल को इतिहास की किताबों में वो जगह क्यों नहीं मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत Allama Fazal-e-Haque Khairabadi Memorial College से एक प्रभात फेरी के साथ हुई। शिक्षकों और बच्चों ने जोशीले नारों से पूरे शहर को गुंजायमान कर दिया।

“अल्लामा फजले हक़ अमर रहे!”, “मंगल पांडेय अमर रहे!”, “राजा हर प्रसाद अमर रहे!”, “सुभाष चंद्र बोस अमर रहे!” के नारे लगाते हुए यह फेरी पहले अल्लामा के स्मारक और फिर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा हर प्रसाद के स्मारक पर पहुँची, जहाँ सभी ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।

खैराबाद में अमर शहीद Allama Fazal-e-Haque Khairabadi की 164th Punyatithi मनाई, उनकी कुर्बानी को सलाम किया गया

मुख्य कार्यक्रम में बोलते हुए संस्था के संरक्षक और पूर्व अध्यक्ष, उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग, Dr. Fida Hussain Ansari ने कहा, “अल्लामा साहब की 1857 की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन अफ़सोस की बात है कि हमारे इतिहास में उनका नाम तक ठीक से दर्ज नहीं है। मैंने अंडमान की उस सेल को देखा है जहाँ उन्हें ‘काला पानी’ की सज़ा दी गई थी। वहाँ की हालत बेहद दर्दनाक और कष्टदायी थी। यह संस्था खोलकर काजिम हुसैन साहब ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है।”

खैराबाद में अमर शहीद Allama Fazal-e-Haque Khairabadi की 164th Punyatithi मनाई, उनकी कुर्बानी को सलाम किया गया

संस्था के Founder, Mr. Kazim Hussain ने अल्लामा के बलिदान को याद करते हुए बताया, “1857 में अल्लामा फजले हक खैराबादी ने ही अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फ़तवा जारी किया और ‘अंग्रेजों हिन्दुस्तान छोड़ो’ का आह्वान किया था। इसकी वजह से सैकड़ों उलेमा शहीद कर दिए गए। अल्लामा साहब को गिरफ्तार कर 1859 में ‘Black Water Penalty‘ यानी काला पानी की सजा सुनाकर अंडमान भेज दिया गया। उनकी सेल इतनी छोटी थी कि न सीधे खड़े हो सकते थे, न ठीक से लेट सकते थे। उसी कैद में 20 अगस्त, 1861 को उन्होंने अंतिम सांस ली।”

इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष Mr. Najmul Hasan Shoaib MiyaQari Islam Ahmad Arfi और शिक्षक Mr. Shah Alam Khan Rana ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन दुआ और इसाले सवाब के साथ हुआ।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकों अब्दुल हफ़ीज़, हाफ़िज़ मुशीर, अहमद, कामरान खान, उमैर आज़ाद, राम रोहित, महिमा रानी, आलिया, नसरीन, महाविश शाहाब, निकहत जहाँ और अकील अहमद मुन्ना के साथ-साथ Local Police Administration के पूर्ण सहयोग के लिए आभार जताया गया।


©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
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