केरल की रहने वाली भारतीय नर्स Nimisha Priya की यमन में बुधवार, 16 जुलाई को होने वाली फांसी अब टाल दी गई है। यह राहत भारतीय सरकार और भारत के Grand Mufti की मानवीय दखल के चलते संभव हो सकी।
कौन हैं Grand Mufti और क्या भूमिका निभाई?
भारत के Grand Mufti शेख कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार (Sheikh Kanthapuram Aboobacker Musliyar) ने इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने यमनी अधिकारियों से निवेदन किया कि फांसी की सजा को कुछ समय के लिए रोका जाए, ताकि पीड़ित के परिवार से बातचीत की जा सके।
Grand Mufti का कहना है कि इस्लाम में एक प्रावधान और भी है, जिसमें यदि मृतक का परिवार चाहे, तो वह दोषी को माफ कर सकता है। उन्होंने यमन सरकार से अपील की है कि बातचीत और माफी के इस विकल्प को पूरी तरह से आजमाया जाए।
मुफ्ती का मतलब क्या होता है?
“मुफ्ती” शब्द इस्लामिक धर्मशास्त्र से लिया गया है, जिसका मतलब होता है – इस्लामी कानून (शरीयत) के अनुसार फतवा (धार्मिक मत/निर्णय) देने वाला विद्वान व्यक्ति। यह व्यक्ति गहरी इस्लामी शिक्षा, अरबी भाषा और शरीयत के कानूनों की समझ रखता है। जब कोई मुस्लिम व्यक्ति या संस्था धार्मिक या सामाजिक सवालों पर स्पष्टता चाहता है, तो मुफ्ती से फतवा लिया जाता है।
मुफ़्ती अबूबकर अहमद (Kerala-based): एक संक्षिप्त परिचय
- मूल रूप से केरल के कोझीकोड से हैं।
- वे Sunni Scholars of India के प्रमुख हैं।
- Jamia Markaz नाम के इस्लामिक संस्थान के संस्थापक हैं।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और धर्म के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उन्होंने कई बार सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक सुधार की बातें कहीं हैं।
Grand Mufti क्यों आगे आए?
इस मामले पर बयान जारी करते हुए शेख अबूबकर अहमद ने कहा कि भारत और यमन के बीच राजनयिक संपर्क सीमित हैं, इसलिए ऐसे में कोई धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व सामने आकर मानवीय पहल करे – यह आज की जरूरत है।
उन्होंने कहा,
“जब किसी भारतीय नागरिक को विदेशी धरती पर मौत की सज़ा सुनाई जाए, तो एक इंसानी हल निकालना हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी बनती है। इसी सोच के साथ मैंने हस्तक्षेप करने का फैसला लिया।”
Grand Mufti ने यह भी याद दिलाया कि भारत की ऐसी पहलें पहले भी खाड़ी देशों में सकारात्मक परिणाम ला चुकी हैं। चूंकि यमन से भारत के वर्तमान संबंध सीमित हैं, इसलिए ऐसे मामलों में धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व का सामने आना ज़रूरी है।
क्या Grand Mufti का कोई सरकारी दर्जा है?
नहीं, भारत में Grand Mufti का कोई कानूनी दर्जा या संवैधानिक मान्यता नहीं है। यह पूरी तरह धार्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा पर आधारित पद है। लेकिन कई बार सरकारी आयोजनों में उन्हें बुलाया जाता है, या उनकी राय ली जाती है।
कैसे शुरू हुई कोशिश?
Grand Mufti ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी पुथुप्पल्ली से विधायक चांडी ओम्मन (Chandy Oommen) ने दी। जानकारी मिलते ही उन्होंने विश्व प्रसिद्ध सूफी विद्वान हबीब उमर बिन हफीज़ (Habib Umar bin Hafeez) से संपर्क साधा।
हबीब उमर ने तुरंत पहल की सहमति दी और कहा कि वो आधिकारिक रूप से इस मामले में मदद करेंगे। उनके कार्यालय ने उत्तरी यमन की प्रशासनिक अथॉरिटीज और मृतक के परिवार से संपर्क किया, ताकि सुलह की कोई राह निकाली जा सके।
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कौन हैं Nimisha Priya और क्या है पूरा मामला?
केरल की Nimisha Priya पर 2017 में यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप है। उन्हें 2020 में दोषी करार दिया गया था। 2023 में यमन के हूती नियंत्रित सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने उनकी अपील खारिज कर दी और मौत की सज़ा को बरकरार रखा।
इसके बाद से उन्हें डेथ रो (मौत की सजा की कतार) में रखा गया और 16 जुलाई, 2025 को फांसी की तारीख तय की गई थी।
भारत का Grand Mufti – धर्मगुरु या समाज सुधारक?
भारत जैसे विविधता से भरे देश में Grand Mufti का रोल बहुत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। वह न सिर्फ इस्लामी सिद्धांतों को समझाता है, बल्कि लोगों को संविधान और समाज के साथ संतुलन में रहना भी सिखाता है। हालांकि, उनके बयान कभी-कभी विवादों में भी घिर जाते हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी से एक धार्मिक मार्गदर्शन की व्यवस्था बनी रहती है।
अब आगे क्या?
Grand Mufti के हस्तक्षेप से फिलहाल कुछ समय की राहत ज़रूर मिली है, लेकिन अंतिम फैसला यमन के पीड़ित परिवार और वहां की न्यायिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।मुफ्ती शेख कंथापुरम ने उम्मीद जताई है कि इस संवेदनशील मामले को इंसानियत और इस्लामी न्याय के उसूलों के साथ हल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब ज़रूरत है कि भारत सरकार, सामाजिक संगठन और धार्मिक प्रतिनिधि मिलकर एक सकारात्मक समाधान की तरफ आगे बढ़ें।
Official Sources_https://www.grandmufti.in/
©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
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