gaza city evacuate order : इजराइली सेना (आईडीएफ) ने शनिवार को गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्से में स्थित गाजा सिटी के ऊपर से हजारों की संख्या में पर्चे गिराए हैं। इन पर्चों में शहर के निवासियों से तत्काल शहर खाली करने और दक्षिणी गाजा में स्थापित मानवीय शिविरों की ओर बढ़ने का आह्वान किया गया है।
इस कदम को इजराइल द्वारा गाजा सिटी को ‘हमास का गढ़’ और ‘कॉम्बैट जोन’ घोषित करने के बाद उठाया गया है, जिसने पहले से ही युद्धग्रस्त इस इलाके में रह रहे लाखों बेबस नागरिकों के सामने भविष्य की अनिश्चितता और भय के नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कहते हैं इजराइल के पर्चे? israel idf pamphlets gaza city evacuate order
पर्चों में, जो अरबी भाषा में छपे हैं, निवासियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी गई है कि गाजा सिटी अब रहने लायक जगह नहीं रही है और उन्हें अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करनी होगी। gaza city evacuate order से लोगो का साहस टूटता नजर आ रहा है।
gaza city evacuate order में कहा गया है, “गाजा सिटी एक खतरनाक युद्ध क्षेत्र बन गई है। आपके अपने अस्तित्व के लिए, तुरंत दक्षिण की ओर पलायन करें और वादी गाजा के पार जाएं।”
News Source: www.aljazeera.com
इजराइली सेना का दावा है कि उन्होंने नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाए हैं और लोग अपने वाहनों से इन रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, यह भरोसा दिलाया गया है कि दक्षिणी इलाकों में उनके लिए अस्थायी अस्पताल, भोजन, पानी और आवास (टेंट) की व्यवस्था की गई है।
‘हमास का गढ़‘ घोषित करने की रणनीति
इजराइली रक्षा बलों ने गाजा सिटी को ‘हमास का गढ़’ करार देते हुए इसे एक सैन्य लक्ष्य में तब्दील कर दिया है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि इजराइल इस पूरे इलाके में व्यापक जमीनी और हवाई सैन्य कार्रवाई की तैयारी में है।
सेना का मानना है कि हमास के प्रमुख कमांड सेंटर, उनके जमीनी ठिकाने और सुरंगों (टनल) का जाल इसी शहर और उसके आस-पास के इलाकों में फैला हुआ है। नागरिकों को हटाने का उनका उद्देश्य स्पष्ट रूप से हमास से लड़ते समय होने वाली आम नागरिक हताहतों की संख्या को कम करना और अपनी कार्रवाई के लिए एक ‘मुक्त’ क्षेत्र तैयार करना है।
gaza city evacuate order – संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने जताई चिंता
इजराइल के gaza city evacuate order पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य मानवीय सहायता संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। इन संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि यह ‘सुरक्षित क्षेत्र’ और ‘पलायन योजना’ पूरी तरह से इजराइल की अपनी initiative है और इसमें उनकी कोई भागीदारी नहीं है।
UN के प्रवक्ता ने कहा, “ऐसा कोई भी निर्देश जो लाखों लोगों को उनके घर छोड़ने के लिए कहता है, उसके गंभीर मानवीय परिणाम हो सकते हैं। हम इस बात पर जोर देते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत, नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना सबसे ज़रूरी है।”
बढ़ते मानवीय संकट की आशंका
gaza city evacuate order को विशेषज्ञ और सहायता कर्मी एक बड़े मानवीय संकट की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। गाजा पट्टी पहले से ही 16 साल के blockade, युद्ध और आर्थिक तबाही की मार झेल रही है। गाजा सिटी और उसके आस-पास के इलाकों में लगभग 10 से 11 लाख लोग रहते हैं। इतने बड़े पैमाने पर जबरन विस्थापन के कई गंभीर नतीजे होंगे:
- ओवरक्राउडिंग और संसाधनों की कमी: दक्षिणी गाजा में पहले से मौजूद शिविरों में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से भीड़भाड़ एक बड़ी समस्या बन जाएगी। भोजन, पीने का साफ पानी, दवाएं और ईंधन जैसी बुनियादी जरूरतों की आपूर्ति पहले से ही क्रिटिकल स्तर पर है, जो और भी खतरनाक स्थिति में पहुंच सकती है।
- स्वास्थ्य सेवा का ढहना: गाजा के अस्पताल पहले से ही घायलों और मरीजों से भरे पड़े हैं। बिजली की कमी और मेडिकल सप्लाई के अभाव में नए सिरे से विस्थापित हुए लोगों, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं देना नामुमकिन होगा।
- बीमारियों का प्रसार: ओवरक्राउडिंग, साफ पानी की कमी और सैनिटेशन के टूटने से हैजा, डायरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
नागरिकों के सामने कठिन सवाल
गाजा के निवासियों के लिए यह एक असंभव सी स्थिति है। एक तरफ उनके सिर पर इजराइली बमबारी का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ अपना घर-बार छोड़कर एक अनिश्चित और संकटग्रस्त भविष्य की ओर जाने का डर है। कई लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या वाकई दक्षिण का रास्ता सुरक्षित है?
क्या उन्हें अपने वाहनों में सफर के दौरान हमला नहीं झेलना पड़ेगा? क्या दक्षिण में वादा किया गया भोजन और आश्रय वास्तव में मौजूद होगा? कई परिवारों के पास पलायन करने के लिए पर्याप्त ईंधन भी नहीं है, और बुजुर्गों, विकलांगों और बीमार लोगों के लिए लंबा सफर तय करना लगभग असंभव है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और राजनयिक प्रयास
इजराइल के इस कदम पर दुनिया भर की सरकारों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ देशों ने इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का हवाला देते हुए नागरिकों को हटाने के फैसले को ‘सावधानी बरतने’ वाला कदम बताया है, वहीं अधिकांश देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है।
मिस्र ने, जो दक्षिण में गाजा की सीमा से लगता है, ने फिलहाल अपनी सीमा खोलने से इनकार कर दिया है, जिससे नागरिकों के लिए बाहर निकलने का रास्ता और भी सिमट गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मामले पर emergency बैठक होने की संभावना है, जहां एक बार फिर युद्धविराम और मानवीय राहत मार्ग खोलने पर जोर दिया जाएगा।
निष्कर्ष: एक अनिश्चित और डरावना भविष्य
गाजा सिटी के ऊपर गिराए गए gaza city evacuate order पर्चे सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे इतिहास का हिस्सा हैं जो गाजा के लोगों के सामने एक और बड़ी त्रासदी ला खड़ा कर सकता है। यह स्थिति एक बार फिर दुनिया के सामने उस जटिल और दर्दनाक सच्चाई को लेकर आई है जहां आतंकवाद से निपटने के नाम पर चलाए जा रहे युद्ध की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।
इजराइल का यह कदम आने वाले दिनों में होने वाली एक बड़ी सैन्य कार्रवाई का संकेत है, जिसके परिणाम कितने भयावह होंगे, इसकी कल्पना मात्र ही डरावनी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल हस्तक्षेप करे और दोनों पक्षों पर दबाव बनाए ताकि नागरिकों की जान बचाई जा सके और एक बड़े मानवीय संकट को टाला जा सके। गाजा के लोगों का अगला कदम उनकी जिंदगी और मौत के बीच का फैसला हो सकता है, और दुनिया को उन्हें इस अंधेरी सुरंग में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
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