ख़ैराबाद में ‘जश्न-ए-ख़ैराबाद ’ का शानदार मुशायरा व कवि सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन।

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ख़ैराबाद ( सीतापुर ) ऐतिहासिक क़स्बे ख़ैराबाद की प्रतिष्ठित सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था ख़ैराबाद फ़ाउंडेशन की जानिब से ‘जश्न-ए-ख़ैराबाद ’ नाम से एक शानदार मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन ईस्टर्न हॉल, दर्गाह हज़रत बड़े मखदूम साहब, शेख सराय में धूमधाम से किया गया।

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साहित्य, तहज़ीब और गंगा-जमुनी संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय तथा बाहर से आए नामचीन शायरों और कवियों ने शिरकत करके महफ़िल को चार चाँद लगा दिए। कार्यक्रम की शुरुआत ख़ैराबाद फ़ाउंडेशन के ज़िम्मेदारों ने मेहमानों का स्वागत कर के की। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर गुहर ख़ैराबादी ने और संचालन ज़िया अल्वी और तनवीर बिस्वानी ने संयुक्त रूप से किया।

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इस के बाद संस्था की जानिब से क़स्बे के बुज़ुर्ज उस्ताद शायर सईद उल हसन खान ” गुहर ख़ैराबादी” को उर्दू और हिंदी साहित्य में उन के योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया । इस दौरान संस्था की तरफ़ से क़स्बे की प्रतिष्ठित बड़ी संगत माखूपुर के महंत श्री कृष्णाचारी जी को संस्था का संरक्षक मनोनीत किया गया, उन के साथ ही लखनऊ की शिक्षाविद् और कवियत्री डॉ0 सुधा मिश्रा को संस्था का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। 

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इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने तालियाँ बजा कर संस्था के इस कार्य की सराहना की, उस के बाद क़स्बे के प्रतिष्ठित दरी व्यवसायी और समाजसेवी श्री हाजी शफ़ीक़ अंसारी को समाजसेवा के उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित भी किया गया । उन के साथ ही क़स्बे के जावेद अनवर खान जुग्गू , निजामुद्दीन, ख़लील खान, शिबली अंसारी और फ़रीद अंसारी को भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उन के योगदान के लिए सम्मानित किया गया ।

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उस के बाद मुशायरा और कवि सम्मेलन का बाक़ायदा आगाज़ हुआ जिस में शायरों और कवियों द्वारा मंच पर एक से बढ़कर एक ग़ज़लें, नज़्में और कविताएँ पेश की गईं, जिन पर श्रोताओं ने दिल खोलकर दाद दी।

लखनऊ से आये शाहबाज़ तालिब ने पढ़ा कि-

दोस्तों का शुमार होना था.
मैं तेरा नाम सुन के चौंक गया..

उस दीवार के ढहने से..
हम पर पड़ी परायी धूप..
अभिश्रेष्ठ तिवारी

सोये हुए नसीब का तारा जगा दिया.
इस इश्क़ ने उसे भी हमारा भी बना दिया..
डॉ0 सुधा मिश्रा

वो हमारा ख़्याल करते हैँ.
अब तलक इस ख़्याल में हैँ हम..
डॉ0 श्वेता श्रीवास्तव अज़ल

वो तो सैलाब बहा ले गया आनन फानन.
मेरी क़िस्मत में कहाँ लिखा था वरना दरिया..
अब्दुल्लाह साकिब

देर रात तक चलने वाले इस मुशायरे में शायरों ने सामाजिक मुद्दों, इंसानी मोहब्बत और हिंदुस्तानी तहज़ीब पर अपने अशआर पेश किए। अंत में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए महंत श्री कृष्णाचारी जी ने कहा कि ख़ैराबाद हमेशा से ज्ञान, साहित्य और भाईचारे की धरती रहा है।
उन्होंने कहा, “मुशायरा और कवि सम्मेलन हमारे समाज को जोड़ने का एक अद्भुत माध्यम है। यहां हिंदू-मुस्लिम सभी एक ही मंच पर बैठकर कला और साहित्य का संदेश देते हैं, यही ख़ैराबाद की असली पहचान है।”

उन्होंने खैराबाद फ़ाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित कराने का अवसर मिलता है। लोकप्रिय समाजसेवी हाजी शफ़ीक़ अंसारी ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा,
“जश्न-ए-खैराबाद सिर्फ एक मुशायरा नहीं, बल्कि हमारी तहज़ीबी पहचान का उत्सव है। खैराबाद संस्कृतियों का संगम है और ऐसे आयोजनों से मोहब्बत, सदभाव और इल्मी रोशनी फैलती है।”

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उन्होंने कहा कि खैराबाद फ़ाउंडेशन लगातार समाज में शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का काम कर रहा है और यह मुशायरा उसकी बेहतरीन मिसाल है। इस कार्यक्रम में लखनऊ से आयीं कवियत्री डॉ0 श्वेता श्रीवास्तव “अज़ल “, डॉ0 सुधा मिश्रा, शाहबाज़ तालिब, अभिश्रेष्ठ तिवारी, अब्दुल्लाह साकिब, सीतापुर से आये मंज़र यासीन, नदीम सीतापुरी, डॉ0 तनवीर इक़बाल बिस्वानी, यासीन इब्न ए उमर, गुहर ख़ैराबादी, सय्यद ज़िया अल्वी, सय्यद मोईन अल्वी, महबूब महमूबढ़ा।दी गुलशन ख़ैराबादी ,ज़ैद ख़ैराबादी, अख्तर मुजीबी, मसूद महमूदाबादी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया ।

मुशायरे में मौजूद श्रोताओं ने हर शायर का खुले दिल से स्वागत किया। मंच से पेश की गई शेरो-शायरी से पूरा हॉल देर रात तक तालियों से गूंजता रहा। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ कवियों और उभरते हुए नौजवान शायरों को भी मंच प्रदान किया गया, जिससे नई प्रतिभाओं का मनोबल बढ़ा ।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के सम्मानित सदस्यों ज़िया अल्वी, नदीम अहमद, सादी फ़ारूक़ी और सादिया खान, अफ़ज़ल यूसुफ़ ने सभी मेहमानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया । ‘जश्न-ए- ख़ैराबाद’ हर लिहाज़ से एक यादगार और ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ


©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध

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