एक ऐसा शिक्षक जो एक गरीब किसान परिवार में जन्मा एवं उसका कार्य आज देश नही बल्कि दुनिया में शिक्षा क्रान्ति लाया है।
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं भारत के राजस्थान के रहने वाले एक गरीब मुस्लिम शिक्षक Mohammad Imran Khan Mewati की जिसने ग्रामीण स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को तकनीक के साथ जोड़कर नई शिक्षा क्रान्ति को जन्म दिया जिससे आज दुनिया के 50 से अधिक देशों के स्टूडेंट फायदा उठा रहे हैं।
राजस्थान के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे मोहम्मद इमरान खान मेवाती ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा कमाल कर दिखाया है जो पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है। 9वीं कक्षा से ही बच्चों को पढ़ाकर घर चलाने वाले इमरान आज 100 से ज़्यादा एजुकेशनल ऐप्स बना चुके हैं जिन्हें 50 देशों के लाखों लोग इस्तेमाल कर रहे हैं!
कौन हैं इंडिया के “ऐप गुरु” Mohammad Imran Khan Mewati
मोहम्मद इमरान खान मेवाती राजस्थान के एक गरीब किसान परिवार में जन्मे साधारण व्यक्ति है। परिवार की जिम्मेदारियों के कारण 9वीं कक्षा से ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर चलाने वाले Mohammad Imran Khan Mewati ने 1999 से अंग्रेजी, गणित और विज्ञान पढ़ाते हुए वर्ष 2008 में खुद से कंप्यूटर सीखकर हिंदी में एजुकेशनल कॉन्टेंट बनाना शुरू किया था।
आज Mohammad Imran Khan Mewati 100 से ज़्यादा इनोवेटिव एजुकेशनल ऐप्स बना चुके हैं जिन्हें 50 देशों के लाखों लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।
आज उनके प्रोजेक्ट दिशारी (कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स), मातृत्व देखभाल ऐप (ग्रामीण महिलाओं के लिए) और युवा शक्ति ऐप जैसे फ्री ऐप्स गाँव-गाँव में शिक्षा क्रांति ला रहे हैं। नके सबसे बेहतरीन नवाचारों में से एक देववाणी ऐप है, जो वीडियो, ई-बुक और इंटरैक्टिव सामग्री के साथ 60,000 संस्कृत छात्रों और शिक्षकों का समर्थन करता है।
Mohammad Imran Khan Mewati क्यों है खास?
- शिक्षा को बनाया सबकी पहुँच में
- दिखाया कि जुनून से कुछ भी संभव है
- गाँव के बच्चों को दिलाई ग्लोबल पहचान
गाँव के स्कूलों में टेक्नोलॉजी क्रांति
Mohammad Imran Khan Mewati ने अंग्रेजी, गणित और विज्ञान पढ़ाया है और सीखने को आकर्षक बनाने के लिए लगातार कुछ नया करते रहे हैं। वर्ष 2008 में उन्होंने हिंदी में ऑफ़लाइन शैक्षिक सामग्री बनाने के लिए स्वयं वेब डेवलपमेंट सिखा जो प्रयास आज Google Play Store पर 100 से अधिक निःशुल्क शैक्षिक ऐप में बदल गया है।
उनके बनाये हुए एप्स के 50 देशों में लाखों डाउनलोड हैं। उनके सबसे चर्चित ऐप्स जैसे प्रोजेक्ट दिशारी (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए), मैटरनल केयर ऐप (ग्रामीण महिलाओं के लिए), और युवा शक्ति ऐप (सामाजिक कल्याण के लिए)- उनकी पहुँच और प्रभाव के लिए व्यापक रूप से सराहे गए हैं। देववाणी ऐप 60,000+ संस्कृत सीखने वालों का समर्थन करता है।
अगर आप प्ले स्टोर पर Mohammad Imran Khan Mewati एप्स सर्च करेंगे तो आपको 100 एजुकेशनल एप्स वहां पर दिखाई देंगे। यह एजुकेशनल एप्स ज्यादातर हिंदी माध्यम में है और बच्चों के लिए है कि वो जब चाहे जहां चाहे और जितना चाहे उसका अध्ययन कर सकें। इमरान खान के डेडिकेशन से खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने साल 2015 में लंदन के कॉन्क्लेव में Mohammad Imran Khan Mewati का जिक्र किया था।
दीया से डिजिटल तक का सफर
- बचपन में केरोसिन लैंप की रोशनी में पढ़ाई
- आज दुनिया भर के बच्चों को दे रहे डिजिटल शिक्षा
- गाँव की समस्याओं को टेक्नोलॉजी से किया सुलझाया
मोबाइल से शुरू हुई क्रांति
- बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलते देखकर आया आइडिया
- खुद से सीखा कोडिंग, बनाए हिंदी में ऐप्स
- सभी ऐप्स बिल्कुल फ्री – कोई शुल्क नहीं
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खास ऐप्स:
- प्रोजेक्ट दिशारी: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
- प्रशास्त: दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए (सरकार द्वारा अपनाया गया)
- नेशनल ई-लाइब्रेरी: भारतीय किताबों का खजाना
PM मोदी ने लंदन में की तारीफ
उनके योगदान को राष्ट्रीय मान्यता तब मिली जब भारत के शिक्षा मंत्रालय को उनके द्वारा दान किए गए शैक्षिक ऐप पर प्रकाश डालते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन के वेम्बली स्टेडियम में वर्ष 2015 में Mohammad Imran Khan Mewati के काम की सराहना की थी। उस वक्त इमरान खान ने सिर्फ 50 एप्स डेवलप किए थे।
स्कूल से आगे की सोच
इनके जैसे लोग ही हमें याद दिलाते हैं कि तकनीक तभी सफल होती है जब उसका उद्देश्य सबकी सेवा करना हो। किसी टेक्निकल बैकग्राउंड के बिना इमरान खान ने 100 से ज्यादा मोबाइल एप्स बनाए। वो भी खुद सीखकर खुद बनाकर। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रतियोगी परीक्षाएं, संस्कृत कोई क्षेत्र ऐसा नहीं जिसमें इन्होंने योगदान ना दिया हो। और सबसे बड़ी बात इनके एप्स बिल्कुल फ्री हैं स्टूडेंट्स की मदद के लिए।
खास बातें:
✔️ 100% फ्री ऐप्स – कोई छुपा शुल्क नहीं
✔️ हिंदी माध्यम के छात्रों पर विशेष ध्यान
✔️ ग्रामीण भारत से निकली डिजिटल क्रांति
✔️ दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रयास
मोहम्मद इमरान खान मेवाती ने NDTV के एजुकेशन कॉन्क्लेव में 100 एप्स में अपने तीन खास एप्स का जिक्र किया था। पहला दिसारी ऐप है जो कंपटीशन की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए मदद करता है। लाखों बच्चे इसको प्रयोग करते हैं और घर बैठे कोचिंग की तैयारी करते हैं।
दूसरा ऐप प्रशस्त ऐप है जो डिसेबिलिटी स्क्रीनिंग के लिए भारत सरकार का ऐप है। यह इनिशियली मैंने डेवलप किया है और अभी इंक्लूसिव एजुकेशन को एनश्योर करने के लिए एक इंस्ट्रूमेंटल ऐप है। तीसरा ऐप राष्ट्रीय ई पुस्तकालय है जिसे आप अपने मोबाइल के माध्यम से भारतीय किताबों को घर बैठे फ्री में पढ़ सकते हैं।
कोरोना काल में की मिसाल
“लेट्स टॉक एजुकेशन” प्रोग्राम से:
- हजारों टीचर्स को सिखाया ऑनलाइन पढ़ाना
- गाँव के बच्चों का नहीं रुका पढ़ाई का सिलसिला
कोरोना के दौरान जब देश का शिक्षा तंत्र हिल गया था, इमरान ने हजारों शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षण दिया। लेट अस टॉक एजुकेशन (LetUsTalkEducation) जैसी पहल ने हजारों बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई।
इमरान सर ने सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि:
- कोविड में LetUsTalkEducation से हज़ारों टीचर्स को ऑनलाइन पढ़ाना सिखाया
- स्कूल में बनवाया मियावाकी गार्डन (200 पौधे) और लाइब्रेरी
- देववाणी ऐप से 60,000 संस्कृत छात्र-शिक्षकों को डिजिटल शिक्षा दी
- प्रशास्त ऐप से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान की व्यवस्था बनाई
गाँव से अमेरिका तक का सफर
फुलब्राइट स्कॉलरशिप पाकर अमेरिका में 16 देशों के शिक्षकों के साथ काम किया। आज भी गाँव के स्कूलों में मस्ती की पाठशाला से बच्चों को करियर गाइडेंस देते हैं। लोगों को जोड़कर स्कूलों की इमारतें ठीक करवाते हैं। जहां इन्होंने दुनिया के शिक्षकों के साथ मिलकर शिक्षा के नए आयाम सीखे और भारत में लागू किए। इनके बनाए गए ऐप से करोड़ों स्टूडेंट्स को फायदा हुआ है।
राजस्थान के अलवर के एक छोटे से गांव से निकलकर इमरान खान मेवाती ने वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े संस्थान भी नहीं कर सके। लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करने वाले यह शिक्षक आज देश भर के करोड़ों छात्रों के लिए रोशनी की मिसाल बन चुका है। इमरान सर की कहानी साबित करती है कि सच्ची लगन और निस्वार्थ भावना से शिक्षा क्रांति लाई जा सकती है!
इमरान सर का मंत्र: “आज के बच्चों को शिक्षित करके ही हम कल के भारत को मजबूत बना सकते हैं!”
इमरान खान को मिले सम्मान
इमरान को ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार और जमनालाल बजाज पुरस्कार सहित प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं।
- 2025 ग्लोबल टीचर प्राइज के फाइनलिस्ट
- PM मोदी ने लंदन में किया सम्मानित
- कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त
©द नेशन स्टोरी, 2025 (The Nation Story)
पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध
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